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डा.आम्बेडकर ने एससी-एसटी ओबीसी को एक सूत्र मे जोड़ा : अनिल मेश्राम

भिलाई। दि बुद्धिष्ट सोसायटी आॅफ इंडिया शाखा छ.ग.राज्य, महिला विंग और भिलाई शाखा द्वारा डा. बाबा साहेब आम्बेडकर के 64 वे महापरिनिर्वाण दिवस (पुण्य तिथि) के अवसर पर प्रातः काल मे डा. आम्बेडकर चौक पावरहाउस और बीएसएनएल चौक सेक्टर 1 मे उनकी क्रमशः प्रतिमा और आदमकद तेलचित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर त्रिशरण पंचशील ग्रहण कर श्रद्धांजलि दी गई। संध्याकाल मे बुद्ध विहार सेक्टर 6 मे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए संस्था के प्रदेश अध्यक्ष अनिल मेश्राम ने कहा कि डा. बाबा साहेब आम्बेडकर बहुत ही दूरदर्शी थे। उन्होने संविधान मे पशु पक्षियो के हित संवर्धन के साथ साथ अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ा वर्ग को संविधान के अनुच्छेद 340, 341 और 342 मे अधिसूचित कर उनके अधिकार सुरक्षित किये थे जिसके कारण यह समाज शैक्षणिक सामाजिक आर्थिक व राजनीतिक रूप से मजबूत हुआ। महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष भारती खांडेकर ने कहा कि अगर बाबासाहेब आम्बेडकर ना होते तो भारत की नारी आज भी पुरूषो के पैर की जूती ही कहलाती और शोषित होते रहती। नारियो को उनके द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारो के कारण आज की नारी भारत मे ही नही विदेशो मे भी अपनी विद्वता और क्षमता का लोहा मनवा रही है। प्रांतीय उपाध्यक्ष अशोक गजभिये, रविन्द्र गणवीर, जयश्री बौद्ध, वंदना बौद्ध, सुधेश रामटेके, बीके निरापुरे आदि ने कहा कि बाबासाहेब आम्बेडकर एक कुशल अर्थशास्त्री, विधि वेत्ता, रक्षा विशेषज्ञ, राजनीतिज्ञ और महान समाज सुधारक थे। सभा मे जीवन सूर्यवंशी, नरेंद्र शेंडे, अश्विन वासनिक, राजू मेश्राम, गौतम खोबरागडे, बिशेसर गजभिये, ठानेन्द्र कामड़े, अजय रामटेके, बीएल गजभिये, नारायण मेश्राम, राजेश वंजारी, अनिल साखरे, सिद्धार्थ बोरकर, धनंजय मेश्राम, नीतू डोंगरे, संगीता तभाने, पुष्पा दाभाडे, सुजाता रामटेके सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सुधेश रामटेके महासचिव ने और आभार प्रदर्शन नरेंद्र शेंडे कोषाध्यक्ष ने किया।

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