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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बताई साहित्य की अहमियत, कहा- यह समाज को बेहतर बनाता है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जो लेखक लोगों के सुख-दुख से जुड़े रहते हैं, उनकी रचनाएं पाठकों को पसंद आती हैं। समाज उन लेखकों को नकार देता है जो समाज के अनुभवों को कच्चा माल मानते हैं। ऐसे लेखकों की रचनाएं एक छोटे से साहित्यिक दुकान तक ही सीमित रह जाती हैं…

 

नईदिल्ली (ए)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक टीवी कार्यक्रम में साहित्य की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि साहित्य मानवता को सशक्त बनाता है और समाज को बेहतर बनाता है। देश के क्षेत्रीय साहित्य में अखिल भारतीय चेतना हमेशा मौजूद रही है। यह चेतना रामायण और महाभारत से लेकर हमारे स्वतंत्रता संग्राम तक की हमारी यात्रा में दिखाई देती रही है और आज के साहित्य में भी देखी जा सकती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जो लेखक लोगों के सुख-दुख से जुड़े रहते हैं, उनकी रचनाएं पाठकों को पसंद आती हैं। समाज उन लेखकों को नकार देता है जो समाज के अनुभवों को कच्चा माल मानते हैं। ऐसे लेखकों की रचनाएं एक छोटे से साहित्यिक दुकान तक ही सीमित रह जाती हैं।
उन्होंने कहा कि जहां बौद्धिक आडंबर और पूर्वाग्रह है, वहां साहित्य नहीं है। लोगों के दुख-दर्द को साझा करना साहित्य की पहली शर्त है। साहित्य को मानवता से जुड़ना चाहिए।  साहित्य मानवता को सशक्त और समाज को बेहतर बनाता है। साहित्य मानवता के शाश्वत मूल्यों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढालता है। साहित्य समाज को नया जीवन देता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों पर कई संतों और कवियों का प्रभाव था। साहित्य के ऐसे प्रभाव का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने मौलिक लेखन और अनुवाद के माध्यम से बाल साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए कहा। क्योंकि इससे देश और समाज को समृद्ध बनाने में मदद मिलेगी।

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