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लोकसभा चुनाव 2024 में पीएम मोदी का लक्ष्य केवल 400 पार नहीं 1984 का रिकॉर्ड तोड़ना भी है

आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एनडीए के लिए 400 पार और खुद के लिए न सिर्फ 370 सीटों का लक्ष्य रखा है बल्कि वो कुल वोटों का 50 फीसदी हासिल करने की भी तैयारी कर रही है। पार्टी की रणनीति में नए गठबंधन बनाना और दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल करना भी शामिल है…

 

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद संसद में 370 सीटों का लक्ष्य रखने का ऐलान किया था, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण है। बीजेपी, हिंदी हार्टलैंड और अपने दूसरे गढ़ों में पहले ही अधिकतम सीटें जीत चुकी है, ऐसे में और सीटें हासिल करना मुश्किल है।इसके बावजूद बीजेपी सरकार ने अपने लक्ष्य के प्रति कमर कस ली है और पिछले चुनाव में जीती गई सीटों से 67 ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पार्टी सत्ता में अपने संभावित तीसरे कार्यकाल की योजनाओं पर भी चर्चा कर रही है। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी बड़े और छोटे दोनों ही दलों के नए गठबंधन और नेताओं को सक्रिय रूप से साथ लाने की कोशिश कर रही है।

बीजेपी ने आंध्र प्रदेश में टीडीपी-जनसेना पार्टी के साथ अपने गठबंधन को अंतिम रूप दे दिया है। हालांकि किसानों के विरोध प्रदर्शनों की वजह से अकाली दल के साथ बातचीत में गतिरोध आया है लेकिन बैक-चैनल वार्ता अभी भी जारी है। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्रियों पी वी नरसिम्हा राव और चौधरी चरण सिंह के साथ-साथ एम एस स्वामीनाथन और कर्पूरी ठाकुर को हाल ही में भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिसे चुनावी साल में राजनीतिक संदेश देने के लिए एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

 

हालांकि बीजेपी के प्रतिद्वंद्वी दावा करते हैं कि ये हरकतें हताशा को दर्शाती हैं, लेकिन पार्टी के नेता कहते हैं कि उनके इस तरीके के पीछे एक सोच है। बीजेपी का लक्ष्य न सिर्फ पूर्ण बहुमत हासिल करना है बल्कि वोट शेयर में 50 फीसदी के करीब पहुंचना भी है। दरअसल, बीजेपी सरकार के दिमाग़ में एक खास आँकड़ा है – 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को मिले 49.10 फ़ीसदी वोट शेयर को पार करना, जहाँ कांग्रेस ने 414 सीटें जीती थीं, जो लोकसभा में किसी भी पार्टी द्वारा हासिल की गई सबसे ज़्यादा सीटें हैं।

 

2019 के चुनावों में मिले 37.36 फ़ीसदी वोट शेयर को बढ़ाकर लगभग 50 फ़ीसदी तक पहुंचाने के लिए बीजेपी को लगभग हर राज्य में अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा। 2019 में बीजेपी ने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में सभी सीटें जीती थीं। मध्य प्रदेश में सिर्फ़ एक सीट गंवाई थी और एनडीए गठबंधन के तौर पर बिहार में दो सीटें गंवाई थीं। उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने 80 में से 62 सीटें हासिल की थीं। राम मंदिर के उद्घाटन को मिले सकारात्मक रिस्पॉन्स की वजह से उसे अपनी संख्या बरकरार रखने या उसमें सुधार करने का भरोसा है। कर्नाटक, एकमात्र दक्षिणी राज्य है जहां बीजेपी एक प्रमुख पार्टी है। वहां पार्टी ने 2019 में 29 में से 28 सीटें जीती थीं। कर्नाटक की एक मात्र अन्य निर्दलीय सांसद सांसद सुमलता अंबरीश, लोकसभा में मोदी सरकार का समर्थन करती रही हैं। 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में मिली हार के बावजूद बीजेपी जेडी(एस) के साथ गठबंधन करके अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

 

बीजेपी ओडिशा और तेलंगाना में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रही है, जहां पिछले प्रयास कम सफल रहे हैं। हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद यह संभावना नहीं है कि बीजेपी 370 सीटों के आँकड़े को पार कर पाएगी। इसलिए, पार्टी आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में सक्रिय रूप से गठबंधन की तलाश कर रही है, जहां उसे सीटें तो नहीं मिल सकतीं लेकिन इन साझेदारियों के ज़रिए वोट हासिल हो सकते है। 2024 में बीजेपी अपने प्रभाव को बढ़ाने और दक्षिणी राज्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए दृढ़ है। हाल ही में हुए बीजेपी राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए चुनाव से पहले सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक ले जाने को कहा गया।

 

जमीनी स्तर पर संगठन पर जोर दिया गया। पार्टी अपने संदेश को मजबूत करने के लिए राज्य, ज़िला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर बैठकें करेगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी अपने संदेश को भी बदलेगी, खास तौर पर हिंदुत्व के बारे में। जहां आक्रामक हिंदुत्व उत्तरी राज्यों में वोटों को मजबूत कर सकता है, वहीं यह दक्षिण में मतदाताओं को अलग-थलग कर सकता है। इसलिए, पार्टी दक्षिण में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को उजागर करेगी। मोदी का मानना है कि वोटों के बहुमत के साथ एक निर्णायक जीत हासिल करने से न सिर्फ़ विपक्ष को एक संदेश जाएगा बल्कि उनकी सरकार के प्रस्तावित नए सुधारों को लागू करने में आने वाली किसी भी बाधा को भी दूर किया जा सकेगा।

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