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सहमति से संबंध बनाने का मतलब महिला से मारपीट करने का लाइसेंस नहीं है : हाईकोर्ट

अगर कोई महिला आपसी सहमति से संबंध बनाती है तो इसका मतलब यह नहीं कि महिला से मारपीट करने का लाइसेंस मिल गया।’ ये टिप्पणई एक मामले में सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने की है…

बेंगलुरु (ए)। एक मामले पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर आपसी समहति से संबंध बनता है तो इसका मतलब यह नहीं की महिला से मारपीट करने का लाइसेंस मिल गया है। हालांकि, न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए बलात्कार और धोखाधड़ी के अपराधों को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता और महिला दोनों बेंगलुरु के रहने वाले हैं और एक सॉफ्टवेयर कंपनी में साथ काम करते थे। दोनों के बीच पांच सालों से संबंध थे।

जुलाई 2022 में, महिला ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी कि एक पुरुष ने शादी का वादे करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए लेकिन बाद में उसे तोड़ दिया। इसके बाद महिला ने अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस से बलात्कार, धोखाधड़ी करने, हमला करने सहित कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज करवाई।

वहीं इसके बाद आरोपी ने महिला के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को यह कहते हुए अदालत में चुनौती दी कि महिला फरवरी 2020 में भी ऐसे ही एक पुरुष पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगा चुकी है। इसलिए महिला द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर को रद्द कर दिया। आरोपी ने दावा किया कि महिला को ऐसे ही अलग-अलग पुरुषों पर मुकदमा दर्ज करवाने की आदत है।

आरोपी की बातों को सुनते हुए और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर गौर करने के बाद, न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने कहा कि सहमति से बनाए गए संबंध के आधार पर बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों को बरकरार नहीं रखा जा सकता है।

हालांकि हमला करने और अन्य आपराधिक मुकदमों को लेकर न्यायाधीश नागप्रसन्न ने बताया कि महिला द्वारा दिए गए प्रमाण पत्रों से यह पता चलता है कि महिला के शरीर पर कई चोटें आईं हैं। जो कि कथित तौर पर आरोपी द्वारा हमला करने के कारण आईं हैं। इसलिए कोर्ट ने मारपीट करने और हमला करने के मामले में पुलिस को जांच करने के आदेश दिए हैं। इस तरह से न्यायाधीश ने महिला की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

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