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साल का अंतिम चंद्रग्रहण आज, जाने इस चंद्रग्रहण से जुड़ी यह 10 बातें और भी बहुत कुछ

इस बार भी यह चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन लग रहा है। इस चंद्रग्रहण का स्पर्श दिन में 12 बजकर 48 मिनट पर होगा। मध्य दिन में 2 बजकर 33 बजे होगा तथा मोक्ष दिन में 4 बजकर 17 मिनट पर होगा। यह चन्द्र ग्रहण भारत के सुदूर पूर्वी सीमा अरुणांचल प्रदेश से अत्यंत कम समय के लिए ग्रहण का मोक्ष सूक्ष्मता से देखने पर ही दृश्यमान होगा..

नईदिल्ली (ए)। स्नान दान सहित पूर्णिमा तिथि का प्रसिद्ध एवं देव दीपावली का पवित्र पर्व 19 नवम्बर 2021 दिन शुक्रवार को बड़े ही धूम-धाम एवं श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस दिन गंगा नदी या किसी पवित्र नदी में स्नान करना पुण्यफल दायक होता है। इसी दिन खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण भी लगेगा। चन्द्र ग्रहण सामान्यतः पूर्णिमा के दिन लगता है ,इस बार भी यह चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन लग रहा है। इस चंद्रग्रहण का स्पर्श दिन में 12 बजकर 48 मिनट पर होगा। मध्य दिन में 2 बजकर 33 बजे होगा तथा मोक्ष दिन में 4 बजकर 17 मिनट पर होगा। यह चन्द्र ग्रहण भारत के सुदूर पूर्वी सीमा अरुणांचल प्रदेश से अत्यंत कम समय के लिए ग्रहण का मोक्ष सूक्ष्मता से देखने पर ही दृश्यमान होगा। भारत के अतिरिक्त विश्व के कई राष्ट्रों जैसे रूस, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैण्ड , इंडोनेशिया और चीन के पूर्वोत्तर भागों से दिखाई देगा। भारत में स्पष्ट रूप से दृश्य नहीं होने के कारण धर्मिक दृष्टि से भी महत्वहीन है।

यद्यपि की भारत मे स्पष्ट रूप से दृश्य नहीं होने के कारण धर्मिक दृष्टि से भी महत्वहीन है फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि ग्रहण काल मे ग्रहों की स्थिति के अनुसार मन का कारक ग्रह चद्रमा वृष राशि मे राहु के साथ होंगे तथा केतु के साथ सूर्य रहेंगे अतः चंद्रमा से प्रभावित होने वाले जातकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।

19 नवंबर यानी आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण को अशुभ घटना माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ व मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। चंद्रग्रहण का सभी 12 राशियों पर प्रभाव देखने को मिलेगा। पढ़ें कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को लगने वाले चंद्र ग्रहण से जुड़ी 10 जरूरी बातें-

1. सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण– 19 नवंबर को सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इस ग्रहण की अवधि ज्यादा होने के कारण इसे सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है।

2. किस राशि में लगेगा चंद्र ग्रहण- साल का आखिरी चंद्र ग्रहण वृषभ राशि में लगेगा। वृषभ राशि में राहु का गोचर चल रहा है। इस कारण वृषभ राशि पर ग्रहण का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

3. चंद्र ग्रहण का समय- हिंदू पंचांग के अनुसार, ग्रहण सुबह 11 बजकर 34 मिनट से आरंभ होगा और शाम 05 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगा।

4. साल का आखिरी चंद्र ग्रहण– 19 नवंबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा। अगला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022 को लगेगा।

5. कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण- कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है।

6. सूतक काल- 19 नवंबर को सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण आंशिक ग्रहण होगा, ऐसे में सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण में ही सूतक काल मान्य होगा।

7. भारत में कहां दिखेगा– 19 नवंबर को भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम, अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।

8. विदेशों में कहां दिखेगा– 19 नवंबर को चंद्र ग्रहण अमेरिका, उत्तरी यूरोप, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में दिखाई देगा।

9.  2021 में कितने लगेंगे चंद्र ग्रहण- साल 2021 में दो चंद्र ग्रहण का योग बना था। 19 नवंबर को साल का अंतिम और दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा।

10. चंद्र ग्रहण कैसे लगता है- चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है तो इसी स्थिति को चंद्र ग्रहण कहते हैं।

करें ये काम-
★खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण के सूतक काल में दान तथा जापादि का महत्व माना गया है। पवित्र नदियों अथवा सरोवरों में स्नान किया जाता है । मंत्रो का जाप किया जाता है तथा इस समय में मंत्र सिद्धि भी की जाती है।

★तीर्थ स्नान, हवन तथा ध्यानादि शुभ काम इस समय में किए जाने पर शुभ तथा कल्याणकारी सिद्ध होते हैं।
★धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी राशि अनुसार अथवा किसी योग्य ब्राह्मण के परामर्श से दान की जाने वाली वस्तुओं को इकठ्ठा कर संकल्प के साथ उन वस्तुओं को योग्य व्यक्ति को दे देना चाहिए।

सूतक काल में न करें ये काम-
किसी भी ग्रहण के सूतक के समय समय भगवान की मूर्ति को स्पर्श करना निषिद्ध माना गया है। खाना-पीना, सोना, नाखून काटना, भोजन बनाना, तेल लगाना आदि कार्य भी इस समय वर्जित हैं।
★इस समय झूठ बोलना, छल-कपट, बेकार का वार्तालाप और मूत्र विसर्जन से परहेज करना चाहिए ।
★सूतक काल में बच्चे, बूढ़े, अस्वस्थ स्त्री आदि को उचित भोजन लेने में कोई परहेज नहीं हैं।
★सूतक आरंभ होने से पहले ही अचार, मुरब्बा, दूध, दही अथवा अन्य खाद्य पदार्थों में कुशा तृण डाल देना चाहिए जिससे ये खाद्य पदार्थ ग्रहण से दूषित नहीं होगें। अगर कुशा नहीं है तो तुलसी का पत्ता भी डाल सकते हैं । घर में जो सूखे खाद्य पदार्थ हैं उनमें कुशा अथवा तुलसी पत्ता डालना आवश्यक नहीं है।
★गर्भवती महिलाएं पेट पर गोबर का लेप कर लें ,चाकू , सुई , इत्यादि से कोई कार्य न करे। सम्भव हो तो टहलें, सोये नही तो उत्तम होगा।
खण्ड ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण भारत मे दृश्य नही होने के कारण धर्मिक दृष्टि से महत्त्व नही है फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अवश्य होता है।

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