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महिलाओं के बिना बेहतर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती : गीतू परमानंद

भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): घर परिवार समाज और दुनिया बिना महिलाओं के संभव नहीं हो सकती। इनके बिना समाज की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। आज महिलाएं अपना मुकाम खुद तय कर रही हैं। महिलाएं समाज का मुख्य हिस्सा होती हैं तथा आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक क्रियाओं में एक बड़ी भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं के बिना बेहतर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। यह सब बातें समाजसेवी श्रीमती गीतू परमानंद ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कहीं। रायपुर की रहने वाली गीतू परमानंद समाजसेवा के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य करते आ रही हैं। इन्होंने अब तक 100 से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई अपने खर्चे पर करवाया। जिन दिव्यांग बच्चों के माता-पिता उनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते और आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। ऐसे बच्चों के बारे में पता चलते ही गीतू परमानंद अपनी सैलरी से ओपन स्कूल से फार्म भरवाकर उन बच्चों को परीक्षा दिलवाती हैं। ऐसे कई दिव्यांग बच्चे हैं जिनको इन्होंंने 10वीं-12वीं से लेकर स्नातक की पढ़ाई का खर्चा उठाई हैं। गीतू परमानंद रायपुर के प्राईवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। अपने आसपास निवास करने वाले गरीब बच्चों को यह निशुल्क ट्यूशन भी पढ़ाती हैं साथ ही यह रक्तदान के क्षेत्र में भी कार्य करती हैं। अब तक 14 से ज्यादा बार रक्तदान स्वयं कर चुकी हैं। गीतू जोशी की प्रारंभिक व हायर सेकेण्डरी तक की शिक्षा रायपुर के ग्राम सेरीखेड़ी में हुई। कन्या महाविद्यालय रायपुर से सन् 2015 में स्नातक (बीएससी) तथा वर्ष 2017 में प्राइवेट स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। पढऩे और पढ़ाने में विशेष रुचि रखने वाली गीतू जोशी महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानती हैं। समाजसेवा करने की प्रेरणा इन्हें इनको इनकी बड़ी बहन  को देखकर मिली जो कि मानसिक रुप से दिव्यांग हैं जिनका यह सेवा करती थीं और उन्हीं से प्रेरित होकर यह दिव्यांग बच्चों सहित अन्य जरुरतमंद लोगों का सहयोग करते आ रही हैं। सितंबर-2019 मेें इनका विवाह हुआ और यह भिलाई में आ गई। समाजिक क्षेत्र में कार्य करने के लिए इनको माय एफएम रेडियो, पश्चिम बंगाल कलकत्ता में मानव रत्न सम्मान, हिमाचल प्रदेश व छत्तीसगढ़ के रोटरी क्लब के द्वारा उत्कृष्ठ कार्य करने के लिए सम्मानित किया जा चुका है। 

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