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CGPSC और DMF मामले में ED की 7 जगह छापामार कार्यवाही, दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में CGPSC परीक्षा अनियमितता और DMF घोटाले से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने CGPSC मामले में आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर तथा DMF घोटाले से जुड़े सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को रायपुर स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 सितंबर तक कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया गया।
यह कार्रवाई CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद जांच के अगले चरण के तौर पर सामने आई है। सोनवानी को 25 जुलाई को परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।

ED की जांच वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों से जुड़ी है। एजेंसी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच CBI द्वारा वर्ष 2024 में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इसके बदले कथित तौर पर अवैध धन का लेन-देन हुआ और इसका लाभ कुछ अभ्यर्थियों तथा संबंधित लोगों को पहुंचाया गया।

ED के वकील सौरभ पांडेय के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में उत्कर्ष चंद्राकर द्वारा अलग-अलग अभ्यर्थियों से करीब 3 करोड़ 11 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन नहीं होने की स्थिति में वन विभाग में पोस्टिंग दिलाने का भरोसा दिया गया था।

वहीं, DMF मामले में गिरफ्तार सतपाल सिंह छाबड़ा पर करीब 30 करोड़ रुपये का कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी अब दोनों से पूछताछ कर कथित लेन-देन और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही है।

ED ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में करीब सात ठिकानों पर जांच की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के PA रहे केके चंद्रवंशी, पूर्व OSD चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत से जुड़े परिसरों में भी तलाशी शामिल रही।

भिलाई में केके चंद्रवंशी के आवास पर ED की टीम सुबह करीब 6 बजे पहुंची। दो से तीन वाहनों में पहुंचे अधिकारियों ने घर में दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की। सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा।

दुर्ग के सिकोला भाठा की बंगाली कॉलोनी स्थित कमलेश राजपूत के आवास पर भी ED की टीम पहुंची। यहां करीब आठ अधिकारियों ने दो वाहनों से पहुंचकर विभिन्न दस्तावेजों की पड़ताल की।

पूर्व OSD चेतन बोरघारिया से जुड़े दो ठिकानों पर भी जांच की गई। वर्तमान में बलरामपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ बोरघारिया से बलरामपुर सर्किट हाउस में पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, धमतरी के अमलतास पुरम स्थित उनके आवास पर भी दस्तावेजों की जांच की गई।

कमलेश राजपूत के परिवार के सदस्यों की सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया है कि उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों को लेकर ED की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इसी मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को जमानत दे दी। ऐसे में एक ओर जांच एजेंसी की कार्रवाई तेज हुई है, वहीं दूसरी ओर मामले से जुड़े दो अधिकारियों को शीर्ष अदालत से राहत मिली है।

ED की ताजा कार्रवाई के बाद CGPSC और DMF से जुड़े मामलों की जांच में आगे और नाम तथा नए वित्तीय लेन-देन सामने आने की संभावना बनी हुई है।

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