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पंडरिया शिक्षाकर्मी भर्ती में अनियमितता के मामले में 22 आरोपियों के विरुद्ध चालान पेश

रायपुर। दिनांक 25.12.1998 को जनपद पंचायत पंडरिया, जिला कवर्धा के तत्कालीन अध्यक्ष अर्जुन तिवारी का शिकायत आवेदन ब्यूरो को प्राप्त हुआ था। शिकायत में भर्ती के दौरान व्यापक भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध चयन के आरोप लगाए गए थे। इसमें साक्षात्कार पंजी के अंकों में काट-छाँट करने, महाविद्यालयों में नियमित रूप से अध्ययनरत अभ्यर्थियों को अध्यापन अनुभव का लाभ देने, आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने तथा चयन समिति के सदस्यों द्वारा अपने नजदीकी व्यक्तियों और रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाने का उल्लेख था। शिकायत पर अपराध क्रमांक 48/2000, धारा 13(1)(डी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 एवं धारा 120बी, 420 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई थी।

विवेचना में पाया गया कि मध्यप्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 1997 के अनुसार आवेदनों की छानबीन के बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की पृथक योग्यता सूची अर्हता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जानी थी। प्रत्येक प्रवर्ग में रिक्त पदों की संख्या से तीन गुने अभ्यर्थियों को योग्यताक्रम के अनुसार परीक्षा अथवा साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना था। जनपद पंचायत की शालाओं में कम से कम एक शिक्षा सत्र तक कार्य कर चुके अभ्यर्थियों को भी नियमानुसार साक्षात्कार में बुलाया जाना था।

इसके विपरीत, साक्षात्कार के लिए तैयार प्रवर्गवार योग्यता सूची में अर्हता परीक्षा के अंकों के साथ अध्यापन अनुभव के बोनस अंक भी जोड़ दिए गए। इससे साक्षात्कार में बुलाए जाने वाले अभ्यर्थियों का योग्यताक्रम प्रभावित हुआ। विभिन्न प्रवर्गों के पात्र अभ्यर्थियों को योग्यताक्रम के अनुसार साक्षात्कार में नहीं बुलाया गया, जबकि निर्धारित योग्यताक्रम के अनुसार पात्र नहीं होने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में सम्मिलित किया गया।

सामान्य महिला वर्ग के 49 रिक्त पदों के लिए 160 महिला अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया गया था। इनमें सामान्य वर्ग की 130, अन्य पिछड़ा वर्ग की 26, अनुसूचित जाति की 03 और अनुसूचित जनजाति की 01 अभ्यर्थी शामिल थीं। अंतिम चयन में महिला अभ्यर्थियों के योग्यताक्रम और प्रवर्गवार समायोजन से संबंधित अभिलेखों के परीक्षण में पाया गया कि क्षैतिज आरक्षण तथा प्रवर्गवार समायोजन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सामान्य प्रवर्ग के दिव्यांग पदों पर चयन और अन्य प्रवर्गों के अभ्यर्थियों के समायोजन से संबंधित अभिलेखों की भी जाँच की गई। इन पदों के लिए सामान्य दिव्यांग प्रवर्ग के पर्याप्त अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद चयन और समायोजन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना पाया गया। अनुसूचित जाति के दिव्यांग प्रवर्ग के 04 रिक्त पदों के लिए नियमानुसार 12 अभ्यर्थियों तथा निर्धारित पात्रता रखने वाले पूर्व शिक्षाकर्मी दिव्यांग अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया जाना था। आवेदन संबंधी अभिलेखों में इस प्रवर्ग के 15 दिव्यांग अभ्यर्थी होने के बावजूद केवल 10 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया गया। प्रत्येक प्रवर्ग की पृथक चयन सूची भी निर्धारित योग्यताक्रम के अनुसार तैयार नहीं की गई।

विवेचना में चयन समिति के सदस्यों द्वारा अपने नजदीकी रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाने के तथ्य भी सामने आए। तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी तथा सदस्य बृजबिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा के नजदीकी रिश्तेदार इस भर्ती में अभ्यर्थी थे। इनमें उग्रसेन चंद्रवंशी, नीरा चंद्रवंशी, विनीता वैष्णव, देवेश वैष्णव, स्वर्णा वैष्णव, श्रीमती कौशल्या वैष्णव और श्रीमती शैल तिवारी शामिल थीं। संबंधित समिति सदस्यों ने अपने रिश्तेदारों के साक्षात्कार के दौरान स्वयं उपस्थित रहकर उन्हें अंक दिए। साक्षात्कार से पहले उन्होंने अपने नजदीकी रिश्तेदारों के अभ्यर्थी होने की घोषणा भी नहीं की थी।

मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में पंचायत पदाधिकारी द्वारा अपनी स्थिति या प्रभाव का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपयोग कर किसी रिश्तेदार को पंचायत में नियोजन दिलाने या आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए कार्यवाही करने को कदाचार की श्रेणी में रखा गया है।

कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्रों के संबंध में भी शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन अभ्यर्थियों ने जिस शिक्षा सत्र का अध्यापन अनुभव दर्शाया था, उसी अवधि में उनके महाविद्यालयों में नियमित छात्र के रूप में अध्ययनरत रहने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने के अभिलेख विवेचना में मिले। चयन समिति के समक्ष उनकी अनुभव संबंधी पात्रता पर आपत्तियाँ और शिकायतें उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें अध्यापन अनुभव के अंकों का लाभ दिया गया।

विवेचना में संकलित मौखिक, दस्तावेजी एवं अन्य साक्ष्यों से संबंधित लोकसेवकों और लाभ प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों द्वारा आपसी साँठगाँठ से भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता करने के साक्ष्य पाए गए। उनकी पृथक-पृथक भूमिका के अनुसार धारा 13(1)(डी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए।

इन साक्ष्यों के आधार पर जनपद पंचायत पंडरिया के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. भारती और अंबिका प्रसाद शांडिल्य, तत्कालीन विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी पंडरिया एन.एल. वस्त्रकार, तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण कवर्धा एन.आर. वर्मा, तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी तथा तत्कालीन सदस्य हरिराम घृतलहरे एवं 16 चयनित अभ्यर्थियों सहित कुल 22 आरोपियों के विरुद्ध लगभग 1,000 पृष्ठों का चालान माननीय विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, कवर्धा के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।

प्रकरण के अन्य आरोपी तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई तथा शिक्षा स्थायी समिति के तत्कालीन सदस्य बृजबिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा की मृत्यु हो चुकी है। उनकी मृत्यु की जानकारी भी चालान में दी गई है।

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