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11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी लोन लेने के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक और उसके सहयोगी के विरुद्ध चालान पेश

रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB), रायपुर ने अपराध क्रमांक 04/2020 की विवेचना पूर्ण कर दिनांक 30.10.2026 को माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत किया। बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर से प्राप्त शिकायत की जाँच के बाद दिनांक 28.01.2020 को यह प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।

प्रकरण में विश्वजीत भौमिक, पिता दिलीप कुमार भौमिक, आयु 56 वर्ष, निवासी विवेकानंद नगर, मोपका, बिलासपुर तथा राहुल कुमार सिन्हा, पिता स्व. मुरारी मोहन सिन्हा, आयु 45 वर्ष, तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा, राजकिशोर नगर, बिलासपुर के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 12 एवं 13(2) के अंतर्गत चालान प्रस्तुत किया गया है। राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा की गढ़सीसा शाखा, जिला कच्छ, गुजरात में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।

विवेचना में पाया गया कि विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा, बिलासपुर स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से लोगों को छोटी राशि के ऋण देने और बैंकों से ऋण दिलाने का काम करता था। वह ऋण लेने आए लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी दस्तावेज और संपत्ति के मूल दस्तावेज लेता था। वह उनसे बैंक प्रपत्रों और कोरे चेकों पर हस्ताक्षर भी करा लेता था। इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग कर उसने संबंधित लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्में बनाईं। कुछ फर्मों में उसने अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर दर्शाया। तीन फर्मों के फर्जी पंजीयन प्रमाणपत्र भी भौमिक के निर्देश पर उसके कार्यालय में तैयार किए गए थे।

दिनांक 20.03.2018 से 03.05.2019 के बीच तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों एवं परिपत्रों की अनदेखी कर 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी एवं टर्म लोन के रूप में ऋण सुविधाएँ स्वीकृत कीं। उन्होंने ऋण लेने वालों से असंबंधित व्यक्तियों की संपत्तियाँ बंधक के रूप में स्वीकार कीं और ऋण स्वीकृति से पहले की निरीक्षण रिपोर्ट में फर्मों के व्यवसाय एवं पते की गलत जानकारी दर्ज की। एक फर्म का व्यावसायिक पता वास्तव में भौमिक का तत्कालीन निवास था। ऋण प्रकरणों के अप्रेजल नोट भी सिन्हा ने तैयार किए थे।

विवेचना के अनुसार, ऋण राशि का उपयोग फर्मों के व्यवसाय में नहीं हुआ। रकम विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर निकाली गई और इसका अंतिम लाभार्थी विश्वजीत भौमिक पाया गया। बैंक ऋण की राशि राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से भौमिक की अपनी फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुँचाई गई। कूटरचित बिलों के आधार पर NSIC, रायपुर से भी भुगतान प्राप्त किया गया।

चालान में आरोप है कि विश्वजीत भौमिक ने तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा के साथ आपराधिक षड्यंत्र कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर 11 फर्मों के नाम पर ऋण सुविधाएँ प्राप्त कीं। ऋण की अदायगी नहीं होने से बैंक ऑफ बड़ौदा को कुल ₹5,04,15,000 (पाँच करोड़ चार लाख पंद्रह हजार रुपये) की आर्थिक क्षति हुई।

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