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7 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी नाबालिग, उसकी मां और सहयोगी को मिली आजीवन कारावास की सजा, तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक महेश ध्रुव ने किया था उत्कृष्ट विवेचना

न्याय को अंतिम व्यक्ति या कहे पीड़ित तक ले जाना ही शासन, प्रशासन और न्याय पालिका का उद्देश्य व प्रथम कर्तव्य होता है इस वाक्य को पूरा कर दिखाया बलौदा बाजार जिला के तत्कालीन सीटी कोतवाली थाना प्रभारी एवं जांच अधिकारी निरीक्षक महेश ध्रुव ने। गांव पुसौरी सीटी कोतवाली बलौदा बाजार में ढाई वर्ष पूर्व एक 7 साल की मासूम से दुष्कर्म कर नाबालिग आरोपी द्वारा अपने मां के साथ मिलकर उस मासूम का गला घोंटकर मार दिया गया और शव कुएं में फेंक दिया था…

इस मार्मिक घटना का शिकायत प्राप्त होते ही तत्कालीन निरीक्षक महेश ध्रुव व उनकी टीम ने उच्च अधिकारियों के दिशा निर्देश पर संघन जांच की और उक्त घटना में संलिप्त आरोपियों को धरदबोचा। 2 साल तक चली न्यायालीन प्रक्रिया पश्चात आरोपी नाबालिक, उसकी मां सहित सहयोगी मुकेश वर्मा उर्फ जगमोहन वर्मा को न्यायालय द्वारा उम्रकैद की साजा सुनाई है…

घटना की जानकारी मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस ने भादवि की धारा 302, 376, 201 धारा 6, 10 पाक्सो एक्ट की धारा में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। करीब ढाई साल न्यायालय में सुनवाई के बाद न्यायालय अपर जिला सत्र एफटीसी पाक्सो एक्ट बलौदा बाजार न्यायधीश प्रशांत परासर ने तीनो आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया है। संभवतः छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार दुष्कर्म, हत्या के नाबालिग आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हुई है…

दुर्ग। घटना दिनांक 26 मई 2021 की है, जिला बलौदाबाजार के थाना सिटी कोतवाली क्षेत्र निवासी 7 वर्षीय मासूम बच्ची अपने पड़ोस की सहेली के घर खेलने गई थी। जब वह शाम तक घर नहीं पहुंची तो उसके माता पिता ने तलाश शुरू की। जब बच्ची का कही कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने सीटी कोतवाली थाना में सूचना दी। सिटी कोतवाली के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक महेश ध्रुव ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत अपनी टीम के साथ उस गांव में पहुंचे और जांच पड़ताल शुरू की। पूरे गांव के लोगो से पूछताछ किया गया।

निरीक्षक महेश ध्रुव वर्तमान में सीटी कोतवाली दुर्ग थाना पदस्थ है, उन्होंने घटना की जांच को सिलसिलेवार तरीके से बताया कि गांव में पहुंचने के बाद जब बच्ची का कही पता चला तो तुरंत मैने डॉग स्क्वायड, फैरेंसिक टीम, लोकल टीम को मौके पर बुलाया और जांच जारी की। परिजनों का बयान लिया गया उसमे मासूम की भाभी ने बताया कि वो 11 बजे पड़ोसी के घर खेलने गई थी फिर 12 बजे खाना खाने आई उसके बाद उसका कही पता नही चला। मासूम का भाई भी बताया कि वो अपनी बहन को पड़ोसी के घर खेलते देखा था, घटना के दूसरे दिन जांच के दौरान मेरी नजर पड़ोसी के बाड़ी के कुएं पर गई। मुझे कुछ शक हुआ तो मैंने डॉग स्क्वायड को वहा बुलाया और डॉग ने जैसे संकेत दिए तो बड़ा बास मंगवाकर कुएं की पानी तो खूब हिलाया गया।

कुएं की पानी के हिलते ही बच्ची का शव औंधे मुंह गिरा हुआ दिखा। खटिया मंगवाकर उसके चारो कोर पर रस्सी बांधकर उसको कुएं के अंदर डालकर शव को निकलवाया गया। जांच के दौरान दो संदेहियों का पता चला, मैने तुरंत उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू किया। पहले तो उसके बहुत गुमराह किया और कहा कि मैं उस दिन घटना स्थल पर था ही नही, मुझे कुछ भी नहीं पता, फिर मैंने उसका सीडीआर निकलवाया। जैसे जैसे साक्ष्य मिलते गए उसके आरोपी को दिखाने के बाद उससे दुबारा पूछताछ करने पर उसने बताया कि बच्ची मेरे घर खेलने आई थी, मैंने दूसरे रूम में उसको ले गया और धान काटने वाला हसिया से उसके सिर पर मारा तो गिर गई फिर मैंने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर घटना को अंजाम देना स्वीकार कर लिया परंतु ऐसा लग रहा था कि आरोपी कुछ छुपा रहा है। दो लोग मिलकर घटना को अंजाम नही दे सकते, बच्ची चिल्लाई होगी तो घर का कोई आया तो होगा ही, ऐसा प्रतीत हो रहा था।

निरीक्षक ने बताया कि आगे आरोपी से घुमाफिरा कर पूछने पर उसने बताया कि जब वो चिल्लाई तो बगल रूम में सो रही मेरी मां उठ गई और दूसरे रूम का दरवाजा खोला तो मुझे देखा और बच्ची का गला दबाकर मार दी। फिर हमने जगमोहन वर्मा को बुलाया और लाश को ठिकाने लगाने को कहा तो हमने शव को बाड़ी के कुएं में फेंक दिया। पहले आरोपी अपनी मां को बचाने के लिए झूठ बोल रहा था।

निरीक्षक ने बताया कि एक एक साक्ष्य को कलेक्ट करते हुए हर जांच और बयान की वीडियो ग्राफी कराई गई। छोटे से छोटे साक्ष्य इक्कठा किया गया। बच्ची जो अपनी भाभी का चप्पल पहनकर आई थी वो कुएं से बरामद कराया, हंसिया बरामद कराया, खून का जहां कतरा गिरा था उसको डॉग स्क्वायड से पहचान करवाया गया। ये केस बहुत ही मार्मिक और सेंसेटिव था जो मेरे लिए बहुत चैलेंजिंग था। मैने केस की डायरी को खुद लिखा था, बहुत मेहनत करना पड़ा लेकिन माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए सजा को सुन कर उतना ही सुकून मिल रहा है की एक मासूम को आज न्याय मिल पाया है। इसके लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने भी इस केस को पर्सनली लिया और लगातार मोनेट्रिंग की और दिशा निर्देश देते रहे, उन्होंने मुझसे कहा था कि इसमें आरोपियों को सख्त सजा दिलवाना है।

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