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छत्तीसगढ़ पुलिस में तुरुप का इक्का और बेसिक पोलिसिंग के एक्सपर्ट माने जाते है IPS विजय अग्रवाल, दुर्ग की फिजा से अच्छी तरह वाकिफ है

दुर्ग@अमित प्रसाद सोनी। राज्य सरकार ने रविवार को दुर्ग सहित ग्यारह जिलों के पुलिस अधीक्षकों सहित 20 आईपीएस अधिकारियों का तबादला आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के जारी होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा दुर्ग जिले के नए कप्तान विजय अग्रवाल की हो रही है जिन्हें पिछले सरकार में वीवीआईपी जिला रहे दुर्ग में पोस्टिंग दी गई है। आईपीएस विजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ पुलिस में तुरुप का इक्का कहा जा सकता है। हम ऐसे ही उन्हें तुरुप का इक्का नहीं कह रहे है इसके पीछे का ये सच आप भी जानिए।

राज्य में जब भी कोई बड़ी या गंभीर घटना होती है तो विजय अग्रवाल को वहां भेजा जाता है। बीजेपी की सरकार के समय 2018 में बिलासपुर में कांग्रेस नेताओं पर लाठी चार्ज हुआ था तब एडिशनल एसपी का ट्रांसफर समेत बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियो के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसके बाद कोई पुलिस अधिकारी बिलासपुर जाना नहीं चाहता था। क्योंकि, वहां कांग्रेस नेताओं द्वारा बडा प्रदर्शन चल रहा था। तब रमन सरकार ने विजय अग्रवाल को भेजा।

पिछली कांग्रेस सरकार में वे जशपुर एसपी थे। जांजगीर में भीम आर्मी का प्रदर्शन और चक्का जामा चल रहा था, तब वहां के एसपी को हटाकर विजय अग्रवाल को जांजगीर भेजा गया। जांजगीर चांपा जैसे जिले में विजय अग्रवाल सब कुछ ठीक कर दिया। कांग्रेस नेताओं के झगड़े में अंबिकापुर की पोलिसिंग ध्वस्त हो गई थी। तब जनवरी 2024 में विष्णुदेव सरकार ने विजय अग्रवाल को अंबिकापुर एसपी बनाकर भेजा था, जहां पहुंचते उन्होंने सब कुछ ठीक कर दिया फिर जून 2024 में ही बलौदा बाजार कलेक्टर परिसर में आगजनी और तोड़फोड़ हुई उसके बाद साय सरकार ने वहां के कलेक्टर-एसपी को हटा दिया। बलौदा बाजार हिंसा के बाद मुख्यमंत्री निवास में हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई थी। इसमें नए एसपी पर भी चर्चा हुई। सभी ने एक सूर में विजय अग्रवाल का नाम सुझाया था।

आईपीएस विजय अग्रवाल जशपुर के एडिशनल एसपी और एसपी भी रह चुके है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उनकी वर्किंग को पर्सनल जानते भी हैं। तभी सरकार बदलने के बाद भी उन्हें जांजगीर चांपा से चुनौतीपूर्ण जिला अंबिकापुर का दायित्स सौंपा गया था और बलौदा बाजार के हालात को देखते हुए उन्होंने वहां भेजने में तनिक भी देरी नहीं लगाई गई।

आईपीएस विजय अग्रवाल बेसिक पुलिसिंग के एक्सपर्ट माने जाते है, इंवेस्टिगेशन में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है। उन्होंने कई गंभीर मामलों का पर्दाफाश किया है। दुर्ग जिला उनके लिए कोई नया नहीं है। वे दुर्ग जिला की फिजा से अच्छी तरह वाकिफ है। वे दुर्ग में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम) के पद पर कार्य कर चुके है साथ ही वे भिलाई स्थित प्रथम वाहिनी में कमांडेंट भी रह चुके है। एसपी के तौर पर दुर्ग उनका पांचवां जिला है।

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