भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस)। महिला पुलिस अधिकारी कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और समझदारी से काम करती हैं। वे अपराधियों को पकड़ने, जांच करने, ट्रैफिक नियंत्रण करने और जनता की मदद करने जैसे कई जिम्मेदार कार्य निभाती हैं। महिलाओं से जुड़ी समस्याओं जैसे घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामलों में महिला पुलिस अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि पीड़ित महिलाएँ उनके सामने अपनी बात आसानी से रख पाती हैं। महिला दिवस पर सारनाथ एक्सप्रेस ने दुर्ग जिला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आईयूसीएडब्ल्यू) इन्वेस्टिगेटिव यूनिट्स फॉर क्राइम अगेंस्ट वूमेन के पद पर पदस्थ ममता देवांगन से विशेष बातचीत की।
एएसपी ममता देवांगन मूलतः दुर्ग जिला के ग्राम सुरडूंग, जामुल से है। उनकी आठवीं तक की शिक्षा शासकीय विद्यालय सुरडूंग से हुई। कक्षा नवमीं से बारहवीं तक की शिक्षा उन्होंने श्रम निकेतन हायर सेकेंडरी स्कूल, जामुल से पूरी की। वर्ष 1998 से 2000 तक उन्होंने महिला आईटीआई भिलाई से अंग्रेजी में स्टेनोग्राफी की। वर्ष 2002 में शादी होने और 2004 में बेटे को जन्म देने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इस दौरान उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर (एमए लोक प्रशासन) की डिग्री हासिल की साथ ही सीजी पीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करती रही।
वर्ष 2008 पीएससी में उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ, जून 2013 से सितम्बर 2014 तक उन्होंने राजनांदगांव जिले में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2011 पीएससी में उनका चयन अप पुलिस अधीक्षक के पद पर हुआ। एकेडमिक ट्रेनिंग के बाद उन्होंने मुंगेली, राजनांदगांव, रायपुर, बेमेतरा, जशपुर, जांजगीर चांपा बटालियन, पुनः रायपुर में अपनी सेवाएं दी। इसी दौरान इसका प्रमोशन हुआ और वे उप पुलिस अधीक्षक से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनी। जनवरी 2026 से वे दुर्ग जिला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आईयूसीएडब्ल्यू) के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है।
पढ़ने और हमेशा कुछ नया सीखने में रुचि रखने वाली ममता देवांगन ने महिला दिवस पर अपने संदेश में कहा कि आज जहाँ कामकाजी महिलाओं पर घर और बाहर दोनों की ज़िम्मेदारी है, ऐसे में अपने काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।
घर में बच्चों को सही परवरिश और संस्कार देना उनकी ही जिम्मेदारी है क्योंकि कल को यही बच्चे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में महिलाओं को पहले से ज़्यादा सतर्क और संतुलित रहने की आवश्यकता है। महिलाएं ख़ुद की योग्यता, कड़ी मेहनत और ईश्वर पर भरोसा रखें। अति महत्वाकांक्षी होने से बचें। निरंतर कुछ नया सीखते हुए ख़ुद को इम्प्रूव करते रहें।

















