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एआई और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल केवल सहायक के रूप में होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह टिप्पणी 11-12 अप्रैल को आयोजित ‘ज्यूडिशियल प्रोसेस री-इंजीनियरिंग एंड डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान आई, जिसे सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी और न्याय विभाग ने मिलकर आयोजित किया था…

 

नईदिल्ली (ए)। न्यायिक क्षेत्र में बढ़ रहे एआई और डिजिटल टूल्स के उपयोग के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा है कि आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल केवल सहायक के रूप में होना चाहिए, इन्हें न्यायिक सोच पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल और डेटा गोपनीयता से जुड़े संभावित जोखिमों पर भी चिंता जताई।

सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह टिप्पणी 11-12 अप्रैल को आयोजित ‘ज्यूडिशियल प्रोसेस री-इंजीनियरिंग एंड डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान आई, जिसे सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी और न्याय विभाग ने मिलकर आयोजित किया था।

इसमें कहा गया कि सम्मेलन के दूसरे दिन चौथे कार्यकारी संस्करण की अध्यक्षता करते हुए, न्यायमूर्ति बिंदल ने टेक्नोलॉजी की भूमिका को न्यायिक विकल्प के बजाय सहायक उपकरण के रूप में रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल उपकरणों का उपयोग सहायक साधनों के रूप में किया जाना चाहिए और इन्हें न्यायिक तर्क को दरकिनार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

समापन सत्र में जस्टिस जे. के. माहेश्वरी ने न्यायिक सुधारों और तकनीकी प्रगति के महत्व को रेखांकित किया, जबकि एक अन्य सत्र की अध्यक्षता जस्टिस संदीप मेहता ने की। सम्मेलन में विभिन्न हाई कोर्ट के जजों और आईटी विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।

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