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छत्तीसगढ़ में पुलिस अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग पर हाईकोर्ट की रोक: वरिष्ठता विवाद ने पकड़ा तूल, अगली सुनवाई 23 सितंबर को

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। वरिष्ठता क्रम को नजरअंदाज कर कथित तौर पर जूनियर अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों का प्रभार सौंपे जाने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 20 जुलाई 2026 के ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश के क्रियान्वयन पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है।
यह अंतरिम राहत एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। मामले की सुनवाई जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ में हुई। अदालत ने राज्य सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

वरिष्ठता सूची में 35वें स्थान पर होने का दावा

याचिकाकर्ता ऋचा मिश्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि पुलिस विभाग की वरिष्ठता सूची में उनका स्थान 35वें क्रम पर है। इसके बावजूद उनसे जूनियर अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट जैसे उच्च पदों का प्रभार सौंप दिया गया, जबकि उन्हें डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदस्थ किया गया है।
याचिका में इसी आधार पर 20 जुलाई को जारी ट्रांसफर और पोस्टिंग आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पदस्थापना में वरिष्ठता के निर्धारित सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया और उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई।

20 जुलाई के आदेश में कई अधिकारियों की हुई थी नई पदस्थापना

राज्य सरकार ने 20 जुलाई 2026 को पुलिस विभाग में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत कई पुलिस अधिकारियों की नई जगहों पर पदस्थापना की गई थी। इनमें कुछ अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट के पद का प्रभार भी सौंपा गया।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि उच्च पद का प्रभार सौंपते समय वरिष्ठता के नियमों की अनदेखी की गई है।

2014 के शासन सर्कुलर का दिया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष 14 जुलाई 2014 को राज्य शासन द्वारा जारी सर्कुलर का भी उल्लेख किया गया। याचिका के अनुसार इस सर्कुलर में प्रावधान किया गया है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को नजरअंदाज कर उससे जूनियर अधिकारी को उच्च पद का प्रभार नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि 20 जुलाई 2026 के आदेश में इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर उन्होंने आदेश पर रोक लगाने और वरिष्ठता के अनुरूप पदस्थापना किए जाने की मांग की।

हाईकोर्ट ने फिलहाल आदेश के अमल पर लगाई रोक

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 20 जुलाई 2026 के ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और मामले में राज्य सरकार तथा अन्य पक्षकारों का जवाब आने के बाद अदालत आगे की सुनवाई करेगी। अदालत ने संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले में वरिष्ठता, पदस्थापना प्रक्रिया और शासन के संबंधित निर्देशों के पालन को लेकर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।

23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक 20 जुलाई को जारी संबंधित ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश पर लगी अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी। पुलिस विभाग में वरिष्ठता के आधार पर उच्च पदों का प्रभार दिए जाने और पदस्थापना की प्रक्रिया को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार की ओर से अदालत के समक्ष अपना पक्ष और आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाएगा।

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