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केंद्र सरकार की राज्यों से अपील- विचाराधीन कैदियों को राहत देने के लिए बीएनएसएस की धारा 479 लागू करें

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे बीएनएसएस की धारा 479 को लागू करें, ताकि आधी सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों को जमानत मिल सके। इससे जेलों की भीड़ घटेगी और पात्र कैदियों को राहत मिलेगी…

 

नईदिल्ली (ए)। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसए) की धारा 479 के प्रावधानों को सक्रिय रूप से लागू करें। इस धारा के तहत ऐसे विचाराधीन कैदियों को जमानत पर रिहा किया जा सकता है, जो अपने अपराध के लिए तय अधिकतम सजा के आधे समय तक जेल में रह चुके हों।

गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और जेल महानिरीक्षकों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि धारा 479(3) के तहत जेल अधीक्षक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह कोर्ट में आवेदन देकर ऐसे पात्र विचाराधीन कैदियों की जमानत के लिए पहल करें।

इस धारा के अनुसार, जो कैदी अपने अपराध के लिए अधिकतम सजा का आधा समय जेल में काट चुके हैं, उन्हें कोर्ट जमानत दे सकती है। अगर कोई पहली बार अपराध कर रहा है, तो उसे एक-तिहाई सजा पूरी करने के बाद जमानत दी जा सकती है। मंत्रालय ने कहा कि वह पहले भी कई बार इस धारा को लागू करने की अपील कर चुका है। इससे लंबे समय से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को राहत मिलेगी और जेलों में भीड़ भी कम होगी।

‘हर महीने गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजें’
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे जेल अधिकारियों को जरूरी निर्देश दें और हर महीने इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजें। मंत्रालय ने 1 जनवरी को भी पत्र लिखा था कि यह सिर्फ एक बार का काम नहीं है, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इसका लाभ पात्र कैदियों को नियमित रूप से दिया जाना चाहिए। यह नया पत्र इसलिए भेजा गया है क्योंकि 26 नवंबर 2024 के बाद केवल कुछ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जानकारी भेजी है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पात्र कैदियों की पहचान करनी चाहिए और उनकी रिहाई के लिए कोर्ट में आवेदन करना चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह भी पहले इस संबंध में सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं और सहयोग की अपील कर चुके हैं।

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