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भारत की 41 फीसदी आबादी पर बीजेपी का अपने बूते राज, कांग्रेस सिर्फ तीन राज्यों तक सिमटी

देश में वर्तमान में छह राष्ट्रीय पार्टियां हैं, भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई (एम), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और आप। ताजा नतीजों के बाद आप दूसरा सबसे बड़ा विपक्षी दल बन जाएगा। आप नेता जैसमीन शाह ने सोशल मीडिया पर कहा कि पंजाब और दिल्ली में सरकार के साथ आप उत्तर भारत में सबसे बड़ा विपक्षी दल बन गया है…

नईदिल्ली (ए)। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों में जीत के साथ भाजपा अब अपने दम पर  देश की 41 फीसदी से ज्यादा आबादी पर राज करेगी, जबकि दूसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हार के बाद तीन राज्यों में सिमट गई है। वहीं, दिल्ली व पंजाब में  सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) राष्ट्रीय पार्टियों में तीसरे स्थान पर है।

भाजपा केंद्र के साथ उत्तराखंड,  यूपी, गुजरात, गोवा, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश में पहले से सत्ता में है। अब एमपी, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में भी उसकी सरकार होगी। इनके अलावा वह हरियाणा, महाराष्ट्र, मेघालय, नगालैंड और सिक्किम में सहयोगियों के साथ सत्ता में है। गठबंधन  के लिहाज से भाजपा का अब देश की आधी से ज्यादा आबादी पर राज  है। कांग्रेस सिर्फ कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश व तेलंगाना में अपने बूते सत्ता में है।  बिहार व झारखंड में वह सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। तमिलनाडु में कांग्रेस की सहयोगी डीएमके सत्ता में है पर वह सरकार में शामिल नहीं है।

आप दूसरा सबसे बड़ा विपक्षी दल
देश में वर्तमान में छह राष्ट्रीय पार्टियां हैं, भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई (एम), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और आप। ताजा नतीजों के बाद आप दूसरा सबसे बड़ा विपक्षी दल बन जाएगा। आप नेता जैसमीन शाह ने सोशल मीडिया पर कहा कि पंजाब और दिल्ली में सरकार के साथ आप उत्तर भारत में सबसे बड़ा विपक्षी दल बन गया है।

गारंटी तो मोदी की ही, हिंदी हार्टलैंड में हर मोर्चे पर भारी पड़ी भाजपा
नतीजों ने साफ कर दिया कि पीएम नरेंद्र मोदी की जनता में गहरी पैठ है। हिंदी हार्टलैंड के तीन अहम राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में जनता का दिल पीएम मोदी के लिए जमकर धड़का, तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान का दांव नहीं चला। भाजपा को व्यापक रणनीति, बेहतर बूथ प्रबंधन का लाभ मिला। कांग्रेस कमजोर रणनीति, अतिआत्मविश्वास और नेताओं के बीच अंतर्विरोध का शिकार हो गई।

भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण पीएम मोदी हैं। वह पार्टी का चेहरा थे। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों के मुताबिक व्यूहरचना बनाई। स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी। हिंदुत्व का तड़का लगाया। चेहरा विशेष पर नाराजगी से बचने के लिए सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा। इसके उलट, कांग्रेस नेताओं में मतभेद, अहंकार और मुद्दाें व रणनीति पर भ्रम रहा। विपक्षी गठबंधन को सहेजने के बजाय खुद राहुल गांधी विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिश करते दिखे। राजस्थान में गहलोत व पायलट ने हाथ तो मिलाए, पर दिल नहीं मिले। पार्टी नेतृत्व अंत तक गहलोत से नाराज रहा, तो मप्र में कमलनाथ ने नेतृत्व को भाव ही नहीं दिया। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के भरोसे बैठी रही, जिनके ओबीसी मोह ने आदिवासियों को पार्टी से दूर कर दिया। वहीं, तेलंगाना में रेवंत रेड्डी को फ्री-हैंड मिला, तो पार्टी वहां जीत दर्ज करने में कामयाब रही।

बूथ प्रबंधन और रणनीति
भाजपा ने स्थानीय समीकरण साधने और बूथ प्रबंधन को प्राथमिकता दी। चेहरा नहीं बनाने के बावजूद शिवराज, रमन और वसुंधरा से जमकर प्रचार कराया। मुद्दों का घालमेल न हो, इसके लिए जिम्मेदारियां बांटीं। राज्यों को सामाजिक प्रकृति के हिसाब से अलग-अलग बांटकर स्थानीय समीकरण के हिसाब से रणनीति बनाई।

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