रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में तिलापिया क्लस्टर एवं मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के संबंध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार विश्वरंजन भी उपस्थित थे। इसमें तिलापिया मछली का उत्पादन बढ़ाने, किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने और प्रसंस्करण के माध्यम से व्यापक बाजार एवं निर्यात की संभावनाएं विकसित करने पर चर्चा हुई।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने तिलापिया उत्पादन को व्यावसायिक स्वरूप देने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन के साथ प्रसंस्करण की व्यवस्था भी विकसित की जाए। बैठक में किसानों ने बताया कि तिलापिया मछली की अच्छी मांग है और प्रसंस्करण सुविधा उपलब्ध होने पर उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना के लिए 100 से 200 किलोमीटर के दायरे में उपयुक्त स्थान तलाशने पर भी चर्चा हुई। इस संबंध में धमतरी के देमार हैचरी सहित कांकेर के संभावित स्थलों की जानकारी जुटाने और उनका निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने संबंधित जिलों से समन्वय कर स्थल चयन और प्लांट के संबंध में प्रस्ताव तैयार करने को कहा।
बैठक में तिलापिया किसानों को संगठित कर मत्स्य कृषक उत्पादक संगठन (एफएफपीओ) गठित करने पर सहमति बनी। इसके लिए करीब 100 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया। चरणबद्ध कार्ययोजना के तहत पहले उपलब्ध संसाधनों, तालाबों के रकबे और वर्तमान उत्पादन का आकलन किया जाएगा। अगले चरण में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज और फीड की व्यवस्था तथा प्रोसेसिंग प्लांट के लिए भूमि, क्षमता और मशीनरी जैसे पहलुओं पर काम होगा। उत्पादन प्रमाणन से जुड़े विषयों को भी प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा।
कलेक्टर ने जल संसाधन और सिंचाई विभाग के साथ समन्वय कर क्लस्टर के तालाबों तक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने, किसानों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने और परियोजना की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने वाली संस्था ‘Nature.dot’ से समन्वय कर उसकी विशेषज्ञता का लाभ लेने पर भी चर्चा हुई।
गौरतलब है कि रायपुर जिले में तिलापिया क्लस्टर के प्रथम चरण में 100 हेक्टेयर जल क्षेत्र को चिन्हित करने का लक्ष्य रखा गया है। तिलापिया मछली तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति है और उचित पोषण एवं प्रबंधन मिलने पर लगभग पांच से छह माह में बिक्री योग्य आकार तक पहुंच सकती है।
क्लस्टर के माध्यम से मत्स्य पालकों को संगठित कर उत्पादन, जल प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण बीज और फीड की उपलब्धता बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। प्रसंस्करण, फिलेटिंग और पैकेजिंग की सुविधा विकसित होने से मछली को स्थानीय बाजार के साथ व्यापक बाजारों तक पहुंचाने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी।

















