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नगर निगम में कफन-दफन की राशि का संकट, गरीब परिवार दर-दर भटकने को मजबूर: नेता प्रतिपक्ष राम खिलावन वर्मा

भिलाई 03। नगर निगम क्षेत्र में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए मिलने वाली कफन-दफन सहायता राशि समय पर नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने अपने परिजन के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो रहा है। सहायता राशि के लिए उन्हें निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उक्त जानकारी नगर पालिक निगम भिलाई-चरौदा के नेता प्रतिपक्ष राम खिलावन वर्मा ने बताई। उन्होंने बताया कि कफन दफन के करीब 30 फाइल दो माह से पेंडिंग है, परिजन निगम का चक्कर काट कर थक गए है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शासन की ओर से जरूरतमंद परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, लेकिन राशि समय पर नहीं मिलने से इसका उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों को आवेदन करने के बाद भी भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा जिस समय उन्हें सबसे अधिक आर्थिक मदद की जरूरत होती है, उसी समय उन्हें कागजी प्रक्रिया और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में निगम प्रशासन से मांग की जा रही है कि कफन-दफन सहायता राशि के लंबित प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए और पात्र हितग्राहियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
निगम प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे किसी गरीब परिवार को अपने मृत परिजन के अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता के लिए दर-दर भटकना न पड़े।

वही नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निगम की स्टेशनरी शाखा में जरूरी सामग्री का अभाव होने से निगम के कामकाज पर असर पड़ रहा है, शाखा में चालान बुक और प्रिंट निकालने के लिए पेपर तक उपलब्ध नहीं है। इसके चलते विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को रोजमर्रा के शासकीय कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्टेशनरी जैसी बुनियादी सामग्री उपलब्ध नहीं होने से दस्तावेजों की प्रिंटिंग, चालान संबंधी कार्य, प्रिंटर का टोनर और अन्य कार्यालयीन प्रक्रियाएं प्रभावित होने की स्थिति बन गई है। कर्मचारियों को आवश्यक सामग्री के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

निगम में बड़ी संख्या में विभाग और शाखाएं संचालित होती हैं, जहां प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों और चालानों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में स्टेशनरी शाखा में कागज और चालान बुक का उपलब्ध नहीं होना निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

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