दो लाख इक्कीस हजार रूपये की चोरी के झुठे आवेदन का बिर्रा पुलिस ने चंद घण्टे में किया पर्दाफाश…आवेदक द्वारा देनदारो को रकम चुकाने से बचने के लिए रची झूठी कहानी…पुलिस को आवेदक के झुठी साजिश नाकाम करने मे मिली बढी सफलता…चोरी कर ले जाने का आवेदन पेश किया था। बाद तत्काल अपने घर चला गया…जिससे फोन से संपर्क करने पर थाना उपस्थित आने में आना-कानी करने लगा…
जांजगीर चांपा। आवेदक नरेश भारद्वाज निवासी बनडभरा थाना बिर्रा जो दिनांक 08.05.26 को अपने खेत जमीन को मां लीला बाई कश्यप को बिक्री किया है। जिसकी बिक्री रकम 2,21,000/- रूपये को अपने घर के अलमारी में रखा था जो रात्रि मे घर के आंगन मे सोने के दौरान किसी अज्ञात व्यक्तियों द्वारा घर के कमरे मे रखे अलमारी को घर से कुछ दूर बाहर ले जाकर अलमारी में रखे रकम चोरी करने के संबंध में आवेदक नरेश भारद्वाज द्वारा दिनांक 09.05.26 को थाना बिर्रा उपस्थित आकर चोरी के संबंध में लिखित आवेदन पेश करते हुये रकम 2,21,000/- रूपये को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा चोरी कर ले जाने का आवेदन पेश किया था। बाद तत्काल अपने घर चला गया। जिससे फोन से संपर्क करने पर थाना उपस्थित आने में आना-कानी करने लगा।
तत्काल थाना बिर्रा पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराये जाने पर श्रीमान् पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा निवेदिता पाल के निर्देशन में एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कश्यप (रापुसे.) के कुशल मार्गदर्शन में एवं उप पुलिस अधीक्षक (अजाक) सतरूपा तारम के पर्यवेक्षण में थाना बिर्रा पुलिस द्वारा घटना स्थल पहुंचकर आवेदक व उसके परिजनो से घटना के संबंध में कडाई एवं मनोवैज्ञानिक रूप से पुछताछ करने पर आवेदक द्वारा बताया गया।
गांव के कुछ लोगों से पैसा रूपया उधारी लिया था जिसे उधार लिये व्यक्तियों को उधार का पैसा देना न पडे जिस कारण आवेदक स्वयं अपने घर के अलमारी को घर से कुछ दूर पर क्षतिग्रस्त स्थिति में छोड़ आया।
उक्त रकम को छत में छुपाकर रखना बताया जो पुछताछ करने पर आवेदक टुटकर छुपाये रकम को पुलिस के समक्ष पेश करने पर परिजनों व गवाहों के समक्ष कुल रकम दो लाख इक्कीस हजार रूपये आवेदक को सुपुर्दनामा मे दिया गया।
पुलिस की सुझबुझ से उक्त चोरी के झूठे आवेदन का पर्दाफाश करने में थाना प्रभारी जय कुमार साहु सउनि टी.आर. जांगडे, सउनि नरेन्द्र शुक्ला, आर. रघुवीर यादव, आर. जनक कश्यप, आर. दीपक तिवारी, म.आर. रितु लहरे का विशेष योगदान रहा।


















