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आज कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव, रात इतने बजे से शुरू होगा भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त

मथुरा और वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और लीलाभूमि होने के कारण जन्माष्टमी का पर्व बेहद खास माना जाता है। इस वर्ष यहां 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में भी जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही धूमधाम और भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस दिन रात 12 बजे भगवान बांके बिहारी की विशेष मंगला आरती होती है, जो सालभर में केवल जन्माष्टमी के अवसर पर ही की जाती है। यही वजह है कि इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंच रहे हैं…

 

मथुरा (ए)। आज देशभर में जन्माष्टमी का महापर्व मनाया जा रहा है. जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती, श्रीकृष्ण जयंती, यदुकुलाष्टमी और अष्टमी रोहिणी के नामों से भी जाना जाता है. हर साल यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, यह भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है।

मथुरा और वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और लीलाभूमि होने के कारण जन्माष्टमी का पर्व बेहद खास माना जाता है। इस वर्ष यहां 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में भी जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही धूमधाम और भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस दिन रात 12 बजे भगवान बांके बिहारी की विशेष मंगला आरती होती है, जो सालभर में केवल जन्माष्टमी के अवसर पर ही की जाती है। यही वजह है कि इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं।

भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में 4 सितंबर की रात मुख्य जन्मोत्सव होगाा। मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण की आकर्षक झांकियां सजेंगी और मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाएगा, भजन-कीर्तन होंगे।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की तिथि 4 सितंबर यानी आज अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो चुकी है, जो कि 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. आज श्रीकृष्ण की पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसके लिए कुल 45 मिनट मिलेंगे. इसी अवधि में लड्डू गोपाल का जन्म होगा और जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था और इसलिए, कृष्ण जन्माष्टमी हमेशा रोहिणी नक्षत्र में ही मनाई जाती है. रोहिणी नक्षत्र अर्धरात्रि में 12 बजकर 29 मिनट पर लग चुका है और इसका समापन आज रात 11 बजकर 4 मिनट पर होगा।

वृंदावन में भी 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। मंदिरों में रात को विशेष पूजा और महाभिषेक होगा। इसके बाद 5 सितंबर को नंदोत्सव की धूम रहेगी। साथ ही बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी के बाद विशेष दर्शन और मंगला आरती का भी महत्व है।

वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी बेहद धूमधाम के साथ मनाई जाती है। साथ ही इस दिन यहां रात 12 बजे बांके बिहारी की मंगला आरती की जाती है, जो पूरी साल में केवल इसी दिन होती है। यानी की साल में 1 बार ही जन्माष्टमी के मौके पर बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती आयोजित की जाती है। इस खास मौके पर लड्डू गोपाल का भव्य महाभिषेक किया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही इस दिन मंदिर भक्तों से खचाखच भरा रहता है।

कृष्ण जन्माष्टमी की पूजन सामग्री

जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लड्डू गोपाल के पूजन और भव्य श्रृंगार के लिए मुख्य रूप से बाल गोपाल की मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और ताजे फूलों की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) और उनके प्रिय भोग के रूप में माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतुफल, मिठाई तथा पान-सुपारी तैयार की जाती है, जिसमें तुलसी दल मिलाना अत्यंत अनिवार्य माना गया है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा

कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप ‘लड्डू गोपाल’ की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन सात्विक रहते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजन स्थल एवं मंदिर को अच्छे से साफ कर सजाएं और बाल गोपाल के लिए एक सुंदर झूला तैयार करें. मुख्य पूजा मध्यरात्रि 12 बजे की जाती है, जब भगवान का जन्म हुआ था; इस समय लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराकर नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से उनका दिव्य श्रृंगार करें।

इसके बाद उन्हें झूले में विराजमान कराकर प्रेमपूर्वक झूला झुलाएं और उनके अत्यंत प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत एवं फलों का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल मिलाना अनिवार्य माना गया है. अंत में धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें, अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और सभी में प्रसाद बांटकर अपना व्रत खोलें।

इन दिव्य मंत्रों का करें जाप

– कृं कृष्णाय नमः
– ऊं देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
– ओम क्लीम कृष्णाय नमः
– गोकुल नाथाय नमः
– ऊं नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नम:

1. जन्माष्टमी की रात 12 बजे लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव के बाद केसर मिश्रित दूध से उनका अभिषेक करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।

2. जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि अगले दिन उस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर उसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है।

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