दुर्ग। जिले में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन द्वारा वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया जल्द पूरी किए जाने की संभावना है। आरक्षण की घोषणा के बाद नगर निगम और नगर पालिका में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो जाएगा और संभावित प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान तेज कर देंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित विभाग द्वारा वार्डों के आरक्षण के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया अंतिम चरण में है और यह उम्मीद लगाई जा रही है आगामी 5 अगस्त के आस पास आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी। सूची जारी होने के बाद किस वार्ड को सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा, इसकी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
आरक्षण तय होने के बाद राजनीतिक दल भी अपने संभावित उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में तेजी लाएंगे। कई दावेदार पहले से ही अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन अंतिम आरक्षण सूची आने के बाद ही चुनावी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट होंगे। वही कई ऐसे उम्मीदवार भी है जिनको अनुमान है कि इस बार उनके वार्ड महिला आरक्षण होगा तो वो शादी भी कर लिए है वही कई वर्तमान पार्षद भी आरक्षण के कारण अपने परिवार या करीबियों को अपने विकल्प तौर पर तैयार रखे है।
वही जिला प्रशासन आरक्षण प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने में जुटी है। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है। चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता लागू हो जाएगी और नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी।
आपको बता दे कि राज्य के चार नगर पालिक निगम में दिसंबर के चुनाव होना है। जिसमें दुर्ग जिला स्थित तीन निगम भिलाई, रिसाली, भिलाई चरौदा और एक नगर पालिक परिषद जामुल में चुनाव होगा साथ ही रायपुर जिला के बीरगांव नगर निगम में भी दिसम्बर में चुनाव होना तय है। दिसंबर में होने वाला निकाय चुनाव इस बार दिलचस्प होगा और दुर्ग जिला हॉट स्पॉट रहेगा क्योंकि यहां तीन निगमों में चुनाव है। दोनों राष्ट्रीय दल के बड़े नेता दुर्ग में डेरा डालेंगे।
2021 निकाय चुनाव की बात करे तो उस वक्त प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेश सरकार ने मतपत्र से निकाय चुनाव करवाया था साथ ही विधानसभा की तर्ज पर पार्षदों ने शहर सरकार (महापौर) चुना था। यानी कि पिछले निकाय चुनाव में जनता को सीधे महापौर चुनने का अधिकार नहीं था। मतलब जिस पार्टी के पार्षद ज्यादा थे उस पार्टी का महापौर बना। पिछले निकाय चुनाव में भिलाई, रिसाली और भिलाई चरौदा में कांग्रेस के महापौर चुने गए थे जबकि जामुल पालिका में भाजपा के अध्यक्ष बने थे लेकिन इस बार प्रदेश सरकार शायद ही पिछले बार की तरह निकाय चुनाव करवाए।
अगर साय सरकार पिछले निकाय चुनाव की तरह बार चुनाव मतपत्र से नहीं कराती है और विधानसभा की तर्ज पर शहर सरकार नहीं चुने जाएंगे तो जनता ईवीएम के जरिये पार्षद और सीधे महापौर चुनने का फिर से मौका मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है और तीनों निगम में कांग्रेस का महापौर है। अब देखना यह होगा कि खास कर दुर्ग जिला की जनता किस पार्टी को अपना समर्थन देती है।
अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि नवंबर माह के अंत में या दिसम्बर माह के शुरू में ही निकाय चुनाव की घोषणा हो सकती है और आदर्श आचार सहित लागू होगा। निकाय चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित उम्मीदवारों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वार्डों के आरक्षण की घोषणा को लेकर सभी की नजरें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।














