जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी माओवादी हमले से जुड़े मामले में करीब 13 वर्षों से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। जगदलपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत में बुधवार को लगातार तीसरे दिन हुई अंतिम बहस पूरी हो गई। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में अब 31 अगस्त को निर्णय सुनाया जाएगा।
अंतिम बहस सोमवार से शुरू हुई थी। पहले दिन अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्यों, तथ्यों और कानूनी पक्ष को अदालत के सामने रखा। इसके बाद मंगलवार को बचाव पक्ष ने अभियोजन की दलीलों का जवाब दिया। बुधवार को बचाव पक्ष की शेष दलीलें सुनी गईं, जिसके बाद अभियोजन ने जवाबी तर्क प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने की तारीख तय की।
परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था भीषण हमला
25 मई 2013 को बस्तर में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर काफिले पर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और बस्तर टाइगर के नाम से प्रसिद्ध महेंद्र कर्मा समेत कांग्रेस के कई नेताओं की मौत हो गई थी। सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
इस घटना ने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले के बाद इसकी जांच और घटना के राजनीतिक पहलुओं को लेकर लंबे समय तक प्रदेश में चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
NIA जांच में 27 मौत और 35 घायल
बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई। NIA की जांच के अनुसार हमले में 27 लोगों की मौत और 35 लोग घायल हुए थे। जांच के दौरान चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया, जबकि बड़ी संख्या में अन्य माओवादियों को भी प्रकरण में आरोपी बनाया गया।
NIA ने इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। अब शेष 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही चल रही है।
31 अगस्त को स्पष्ट होगी आरोपियों की न्यायिक स्थिति
जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित NIA की विशेष अदालत में लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने पक्ष में साक्ष्य और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए। अंतिम बहस पूरी होने के साथ ही अब अदालत के फैसले का इंतजार है।
31 अगस्त को आने वाला फैसला इस मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों की न्यायिक स्थिति स्पष्ट करेगा। झीरम घाटी कांड आज भी छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा से जुड़ी सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल है। ऐसे में अदालत के निर्णय पर पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और प्रदेश की जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।





















