खास खबरघर-परिवारफीचर्ड

आज इस शुभ मुहूर्त में करे गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना; जानिए भोग, मंत्र, आरती और पूजा विधि?

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी. इस दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से बप्पा की पूजा करेंगे. उन्हें मोदक, लड्डू और अन्य पसंदीदा भोग अर्पित किए जाएंगे. आइए आपको बप्पा की स्थापना की विधि और मुहूर्त बताते हैं…

 

मुंबई (ए)। गणेश चतुर्थी का त्योहार आज 14 सितंबर को मनाया जाएगा. इसी तिथि से गणेश महोत्सव की शुरुआत हो जाएगी, जो कि 25 सितंबर तक चलेगा. गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और अगले दस दिन तक घर-घर में बप्पा का विधिवत पूजन होगा. गणपति जी को लड्डू और मोदक का भोग अर्पित किया जाएगा. कुछ बड़े पंडालों में भव्य और रंगारंग कार्यकर्मों का आयोजन किया जाएगा।

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने की परंपरा है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त घर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। आइए इसी कड़ी में आपको गणेश चतुर्थी पर गणपति जी की प्रतिमा की स्थापना का मुहूर्त और पूर्ण विधि के बारे में बताते हैं।

गणेश चतुर्थी 2026 स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे
गणेश चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे
गणपति स्थापना और पूजा का मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक।

गणपति स्थापना की पूजन विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठें. स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. जिस जगह गणेश प्रतिमा स्थापित करनी है, वहां पवित्रता का ध्यान रखें. पूजा स्थान पर एक साफ चौकी रखें. चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. इसके बाद उस पर थोड़े अक्षत यानी चावल रखें. इसके बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें. प्रतिमा का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है. प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव करें. इससे पूजा स्थल और प्रतिमा की शुद्धि की जाती है।

गणेश प्रतिमा के पास एक कलश रखें. इसमें जल भरें. कलश में आम के पत्ते, अक्षत, सिक्का और सुपारी डालें. कलश पर मौली बांधें. इसके ऊपर नारियल रखें. अब घी का दीपक जलाएं. गणपति बप्पा और कलश पर रोली या चंदन से तिलक करें. इसके बाद भगवान को फूल, दूर्वा और अक्षत अर्पित करें. गणपति जी को मोदक, लड्डू, फल, मिठाई और अन्य पसंदीदा चीजों का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की आरती करें. अंत में हाथ जोड़कर बप्पा से घर-परिवार के सभी विघ्न दूर करने और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें. जितने दिनों तक घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित रहे, उतने दिनों तक सुबह और शाम पूजा करें. भगवान को भोग लगाएं. आरती करें और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करें।

बप्पा को इन चीजों का भोग लगाएं
भगवान गणेश को मोदक, बेसन के लड्डू. तिल और गुड़ के लड्डू. सूजी का हलवा, पंचामृत, नारियल के लड्डू, केसरिया खीर और मौसमी फल का भोग लगाया जा सकता है. भोग लगाते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखें. अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान को भोग अर्पित करें।

गणपति स्थापना के प्रमुख मंत्र

1. ॐ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा॥

2. श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ.
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

3. ॐ गं गणपतये नमः।

4. ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा।

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती (माता पार्वती के मंत्र), पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button