भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और देवताओं का शिल्पकार माना जाता है। 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन फैक्ट्रियों, वर्कशॉप्स, मशीनों, औजारों और वाहनों की विशेष पूजा की जाती है। यह पर्व सिर्फ मशीनों की पूजा का ही नहीं, बल्कि अपने काम, कला और कौशल के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी दिन है…
नईदिल्ली (ए)। सनातन धर्म में हर साल कन्या संक्रांति के दिन पड़ने वाली विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सृष्टि के पहले वास्तुकार और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा हैं। हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा पर विशेष रूप से कारखानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा होती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान के साथ पूजा करने के जीवन में सुख-समृद्धि, उन्नति और धन की प्राप्ति होती है।
भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, वास्तुकला, शिल्पकला और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है. इसी वजह से कारीगर, इंजीनियर, बढ़ई, शिल्पकार और मशीनों से जुड़े लोग उन्हें विशेष रूप से पूजते हैं।
आज 17 सितंबर को विश्वकर्मा भगवान की पूजा-आराधना होगी। इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। विश्वकर्मा जयंती पर औजारों और कारखानों की पूजा के साथ भगवान विश्वकर्मा की आरती का भी खास महत्व होता है।
विश्वकर्मा पूजा विधि
- विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले अपने सभी औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की अच्छी से सफाई कर लें।
- फिर पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र बनाएं।
- इसके बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और वहां लाल रंग के कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
- पूजा की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करें।
- फिर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करें। उन्हें हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और फल अर्पित करें।
- फिर अपने सभी औजारों और मशीनों पर तिलक लगाएं। साथ ही फूल और अक्षत भी चढ़ाएं।
- साथ ही ‘ॐ विश्वकर्मणे नमः’ मंत्र का जाप करें।
- फिर पूजा के अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।
- आरती के बाद सभी में प्रसाद बांट दें।
- फिर किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
आरती
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।










































